Sunday, 16 October 2016

Hindi Font sex story - माँ, बेटा और मालिश

हाय, मेरा नाम सुमित है। मुझे अभी तक यकीन नहीं होता जो मैं लिखने जा रहा हूं। ३ दिन पहले मेरे साथ ऐसा एक्सपेरिएंस हुआ जो मैं सोच भी नहीं सकता था। हुआ यूं कि मेरी पूरी फ़ेमिली (मेरा संयुक्त परिवार है) किसी शादी पे दो दिन के लिये चली गयी। घर सिर्फ़ पापा, मम्मी और मैं था। सुबह पापा भी ओफ़िस चले गये। मम्मी कामवाली के साथ काम करने लगी और मैं अपने कमरे मैं स्टडी करने चला गया। करीबन दपहर एक बजे कामवाली चली गयी। मैं स्टडी कर रहा था के मुझे मम्मी की आवाज़ अयी। मैं कमरे के बाहर गया तो देखा कि मम्मी फ़र्श पर गिरी पड़ी थी। मैने फ़ौरन जाकर मम्मी को उठाया और पूछा "क्या हुआ" "फ़र्श पर पानी पड़ा था, मैने देखा नहीं और गिर गयी" "चोट तो नहीं लगी" "टांग मुड़ गयी" "हल्दी वाला दूध पी लो" "नहीं, उसकी ज़रूरत नहीं। बस टांग में दर्द हो रहा है, लगता है नश पे नश चढ़ गयी है" "थोड़ी देर लेट जाओ" "मुझसे चला नहीं जा रहा, मुझे बस मेरे कमरे तक छोड़ आ" "आराम से लेट जाओ और अब कोई काम करने की ज़रूरत नहीं है" "हाय रे, टांग हिलाई भी नहीं जा रही" "मैं कुछ देर दबा दूं क्या" "दबा दे" मैने टांग दबानी शुरू की। मैं पूरी टांग दबा रहा था, पैर से लेकर जांघ तक "कुछ आराम मिल रहा है?" "हां" "मेरे ख्याल से तो आप थोड़ा तेल लगा लो, जल्दी आराम मिल जायेगा" "कौन सा तेल लगाऊं" "वो ही, जो बोडी ओयल मेरे पास है" "चल ले आ" मैं अपने कमरे से जाकर तेल ले आया। मम्मी ने अपनी शलवार ऊपर उठा ली लेकिन वो घुटने से ऊपर नहीं उठ पयी। मैने कहा "अगर आपको ऐतराज़ न हो तो मैं ही लगा दूं" इतने में फोन की बेल बजी। फोन पे पापा ने कहा कि वो आज खाना खाने नहीं आयेंगे। "किसका फोन था" " पापा का था कि वो खाना खाने नहीं आ रहे" "अच्छा" "तेल लगा दूं?" "लगा दे" फिर मैने मम्मी के पैर से लेकर घुटने तक तेल लगाना शुरू कर दिया कुछ देर बाद मम्मी बोली "पर दर्द तो मेरे घुटने के ऊपर हो रहा है" "एक काम करते हैं। आप तांग के ऊपर कम्बल कर लो, मैं कम्बल के अन्दर हाथ डाल के आपके जांघ की मालिश कर दूंगा" "मैं खुद ही कर लूंगी" "मैं एक बार कर देता हूं आपको आराम जल्दी मिल जायेगा" "अलमारी से कम्बल निकाल के मेरे ऊपर कर दे" मैने मम्मी के ऊपर कम्बल कर दिया. फिर मैने कम्बल के अन्दर हाथ डाल के मम्मी की शलवार का नाड़ा खोला और शलवार घुटनों के नीचे सरका दी। मम्मी ने अपनी आंखें बंद कर ली। मैने मम्मी की जांघ पर तेल लगाना शुरु किया। ऊऊओह। मम्मी की जांघ का अनुभव बहुत ही मादक था। "मम्मी कहां तक लगाऊं तेल" "बेटे थोड़ा तेल जांघ पर" मैने मम्मी की जांघ पर अंदर की तरफ़ तेल लगाना शुरु किया तब मम्मी ने अपनी टांगे थोड़ी फ़ैला ली। मैं तेल मलते हुए कभी कभी अपना हाथ मम्मी की पैंटी और चूत के पास फेरता रहा। मैं कम्बल में खिसक गया और मम्मी की टांगें अपनी कमर की साइद पे रख के तेल लगाता रहा। "मम्मी, अगर आप उलटी लेत जाओ तो मैं पीछे से भी तेल लगा दूंगा" "अच्छा" "मम्मी शलवार का कोई काम नहीं है, इसे उतार दो" "नहीं, खोल के घुटनों तक सरका दे" "अच्छा" फिर मम्मी पेट के बल लेत गयी अब मैं मम्मी की दोनो टांगों के बीच में बैठा हुआ था "मम्मी कुछ आराम मिल रहा है" "हम्म" "मम्मी एक बात बोलूं" "हम?" "आपकी जांघें सोफ़्टी की तरह मुलायम हैं" मम्मी इस पर कुछ नहीं बोली। मैने तेल मम्मी की हिप्स पर लगाना शुरु कर दिया "मम्मी आपकी हिप्स को छू के ..." "छू के क्या?" "कुछ नहीं" "बता न छू के क्या?" "आपके हिप्स को छू के दिल करता है कि इन्हें छूता और मसलता जाऊं। आपकी जांघें और हिप्स बहुत चिकनी हैं। तेल से भी ज़्यादा चिकनी। मम्मी क्या आपकी कमर भी इतनी ही चिकनी है?" "तुझे नहीं पता? खुद ही देख ले" "मम्मी आप पहले के जैसे पीठ के बल लेट जाओ" "ठीक है" फिर मैं मम्मी के पेट और कमर पर हाथ फेरने लगा "बेटे अब मैं बहुत मोटी होती जा रही हूं, है न?" "नहीं मम्मी, आप पहले से ज्यादा सेक्सी लगने लगी हो?" "क्या लगने लगी हूं?" "सेक्सी" "बेटे सेक्सी का क्या मतलब होता है?" "सेक्सी का मतलब होता है कामुक" "सच्ची, मैं तुझे कामुक लगती हूं?" "हां, मम्मी मैने आज तक इतनी चिकनी हिप्स नहीं देखी, क्या मैं आपकी हिप्स पे किस कर सकता हूं?" "क्या" "प्लीज़ मम्मी, बस एक बार" "पर किसी को बताना मत" "बिल्कुल नहीं बताऊंगा" मैं मम्मी की हिप्स पे किस करने लगा और जीभ से चाटने भी लगा "बेटे कम्बल निकाल दे" मैंने कम्बल निकाल दिया "मम्मी आपकी हिप्स के सामने तो अमूल बटर भी बेकार है" "अच्छा" "मम्मी मैं एक बार आपकी धूनी(नाभि) पे किस करना चाहता हूं" "नहीं, तूने हिप्स पे कहा था और वो मैंने करने दिया और तूने तो उसे चाटा भी है, अब और नहीं" "प्लीज़ मम्मी, जब हिप्स पे कर लिया तो धूनी से क्या फ़र्क पड़ता है?" "तो आखिर करना क्या चाहता है?" "मैं तो आपकी जांघों

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